Savan Maas-2018 || भोलेनाथ को क्यों प्रिय है श्रावण मास || Suresh Shrimali


भोलेनाथ को क्यों प्रिय है श्रावण मास

सभी मासों में क्यों अति प्रिय है भोलेनाथ को श्रावण मास और इसका क्या है पौराणिक महत्व? आइए जानते है-
पौराणिक कथा के अनुसार जब सनत कुमारों ने त्रिपुरारी से श्रावण मास इतना प्रिय क्यों है पूछा तो त्रिपुरारी ने उन्हें बताया की जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योगशक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था, तब देवी सती ने अपने हर जन्म में त्रिपुरारी को ही पति रूप में पाने का प्रण लिया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमालय और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के श्रावण महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया, तब से महादेव के लिए यह माह विशेष हो गया।

श्रावण मास पर किन-किन द्रव्यों से अभिषेक किया जाना चाहिए-

किन-किन द्रव्यों के अभिषेक से त्रिपुरारी होते है अत्यंत प्रसन्न और क्यों किया जाता है इन्हीं द्रव्यों से उनका अभिषेक, आइए जानते है-

श्रावण मास में भक्तों द्वारा भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार से अभिषेक किये जाते है। जिनमे प्रमुख रूप से जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल और गन्ने का रस प्रयोग में लाया जाता है। ऐसा कहा जाता है की समुंद्र मंथन में अमूल्य रत्न, अमृत के साथ-साथ सबसे विषाक्त जहर भी निकला था, उस जहर में इतनी क्षमता थी की उससे सब कुछ नष्ट हो सकता था और किसी भी देवी-देवता अथवा दैत्य में उस जहर से पार पाने का दम-खम नही था। तब ये जिम्मा महादेव ने उठाया और उस जहर को अपने कंठ में धारण कर लिया। जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया, इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। उस जहर के घातक असर से वो मूर्छित हो गए, जिससे सभी देवता भयभीत हो गए और इन सभी द्रव्यों का प्रयोग उनके शरीर पर डाल, उन्हें मूर्छा से बाहर लाने के किया था। जिसके पश्चात ही भोलेनाथ की मूर्छा टूटी और वो होश में लौटे। इसी कारण शिवलिंग पर इन सभी द्रव्यों से उन्हें अभिषेक किया जाता है। इस क्रिया के पश्चात शिवलिंग पर बेल पत्र, आँक, कमल पुष्प, दूब, कनेर पुष्प, कुशा एवं राई पुष्प प्रमुख रूप से चढ़ाए जाते है। आज के दिन विशेष रूप से धतुरा, श्रीफल और भांग का प्रयोग भोग चढाने के रूप में किया जाता है।  

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