HOLI 2019 | होली पर वैदिक पंरपरा से ऐसे करें | Suresh Shrimali


होली पर वैदिक पंरपरा से ऐसे करें 
चन्द्र-पूजा ! भरेगी खुशियों से झोली


दर्शकों, नमस्कार। हंसी-ठिठोली, आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम-सद्भाव से रहने का संदेश देने वाला त्यौहार - रंगों का पर्व, - होली - यानी नेगेटिव एनर्जी को हराकर पोजिटिव एनर्जी गेन करने का त्यौहार  20 मार्च को आ रहा है। आज से हम होली महा ऐपीसोड का प्रारंभ कर रहे हैं और इसमें जानेंगें कि होली पर कैसे धन लाभ करें, कैसे परिवार में खुशियों के रंग भर लें और कैसे वर्ष भर सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त करें, यह सब जानेंगे। लेकिन सबसे पहले तो यह जानें कि वैदिक काल में होली कैसे मनाते थे, और कैसे कामनाएं पूरी करते थे, हम भी आज वैसे ही होली मनाएं तो हमें भी सुख-समृद्धि और शंाति का आशीर्वाद प्राप्त होगा। दर्शकों,  फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। भारतीय संवत के अनुसार यह भारतीय चन्द्र-वर्ष का आखिरी पूर्ण चन्द्र होता है, इसके बाद नव संवत का चैत्र कृष्ण पक्ष प्रारंभ हो जाता है। फिर चन्द्रमा क्षीण होने लगते हैं जो अमावस्या तक क्षीण होते हैं। शुक्ल प्रतिपदा को नव-वर्ष के प्रारंभ के साथ ही नए चन्द्रमा का उदय होता है, जो वर्ष भर क्षीण-उदय होता रहता है। चन्द्रमा मनसो जातः मन का कारक है, कहते हैं मन के हारे, हार मन के जीते जीत। यानी मन से हार कर ही हम अनुचित, अनैतिक कर्म करते हैं, मन के जीते हम अच्छे व्यवहार से शुभ कर्म कर सक्सेस पाते हैं। अनुचित-अनैतिक तरीके हम तब अपनाते हैं जब मन से विचारों से हम नेगेटिव हो जाते हैं और जब मन से विचारों से पोजेटिव होते हैं तो जीवन मे सफलता पाते रहते हैं। इसलिए चन्द्रमा को पूजा अर्चना से शुभ कर लेना चाहिए। वैदिक काल में वर्ष के अंतिम पूर्ण चन्द्र से शुभता का आशीर्वाद लेने परिवार की सभी विवाहित महिलाए होली पर श्रृंगार कर छत पर जाती और अपने हाथों में चांदी की थाली मेें सूखे छूआरे, मखाने और शुद्ध घी का दीपक जलाकर पहले चन्द्रमा की पूजा करतीे, फिर दूध से चन्द्र को अध्र्य दें केसर मिश्रित साबूदाने की खीर अर्पित करतीं। इसके बाद पूर्ण चन्द्र से प्रार्थना कि वर्ष भर की शुभ अशुभ घटनाएं भूलकर हमें नए संकल्प और नए प्रारंभ का आशीष दें। वैदिक परंपरा अनुसार इस प्रकार की चन्द्र पूजा से पूरे वर्ष घर में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है। इस बार आप भी ऐसा ही करें। होलिका दहन का मुहूर्त पहले तो हो तो होलिका पूजन के बाद पूर्ण चन्द्र की पूजा करें और यदि होलिका दहन मुहूर्त विलंब से हो तो चन्द्र उदय के साथ ही आप यह पूजा करें। वैदिक काल में माना जाता था कि वर्ष भर जो अच्छी-बुरी घटनाएं होनी थी वे तो हो - ली। यानी हो चुकी, अब नए कम्टिमेन्ट, नई एनर्जी के साथ नई शुरूआत का संकल्प करें। एक बात हमेशा ध्यान रखें कि इस पर्व का संदेश यह है कि सक्सेस पर कभी घंमड न करें वरना हम ईश्वार से प्राप्त सिद्धियों का लाभ नहीं उठा पाते उलटे बर्बादी की ओर बढते हैं। कैसे यह मैं आपको कल बताउंगा। 

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