महादेव भी नहीं बच पाएं शनिदेव की वक्र दृष्टि से || Suresh Shrimali



 महादेव भी नहीं बच पाएं
  शनिदेव की वक्र दृष्टि से 

एक बार अचानक हिमालय पर शनि देव विचरण करने चले गए। भोलेनाथ से भेंट होने पर उन्होंने उनसे कहा कि कल आपकी राशि में मेरी वक्र दृष्टि पड़ने वाली है, यह सुन भोलेनाथ आश्चर्यचकित हुए और उन्होंने शनिदेव से उनकी वक्र दृष्टि की समयावधि जाननी चाही, उत्तर में शनिदेव ने उन्हें सवा प्रहर का समय बताया। यह सुन भोलेनाथ कुछ चिंतित हुए और इससे बचने के लिए हिमालय से उन्होंने मृत्युलोक के लिए प्रस्थान किया। वहाँ पहुच कर उन्होंने एक हाथी का रूप धारण कर लिया और सवा प्रहर की समाप्ति तक उसी रूप में रहे। फिर कैलाश पर्वत लौट आए। वहाँ उन्हें शनिदेव मिले, शनिदेव को भोलेनाथ ने मुस्कुराकर कहा कि तुम्हारी वक्र दृष्टि का मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। तब शनिदेव ने मुस्कुरा कर कहा कि उनकी दृष्टि से न तो देव बच सकता है और ना ही दानव। इसीलिए आप देव योनी छोड़कर पशु योनी में जाने के लिए विवष हो गए थे। 
    शनिदेव की बात सुनकर और उनकी न्यायप्रियता से प्रभावित होकर महादेव ने उन्हें गले से लगा लिया।

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